नमो शेतकरी की 8वीं किस्त का अपडेट: नाम हटाए जाने की अफवाहों के जैसे ही सर्दी का मौसम शुरू होता है, घरों में हीटर, गीज़र और ब्लोअर का इस्तेमाल आम हो जाता है। सुबह नहाने से लेकर रात को सोने तक, ये उपकरण लगातार चलते रहते हैं। इसका सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ता है और कुछ ही हफ्तों में बिल सामान्य से कहीं ज़्यादा हो जाता है। लोग अक्सर यह नहीं समझ पाते कि अचानक बिजली का बिल इतना ज़्यादा क्यों बढ़ गया है।
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आजकल, पारंपरिक गीज़रों की तुलना में स्मार्ट गीज़र ज़्यादा पसंद किए जा रहे हैं। इनमें वाई-फाई कनेक्टिविटी होती है, जिससे इन्हें मोबाइल ऐप के ज़रिए चालू या बंद किया जा सकता है। शेड्यूलिंग फ़ीचर की मदद से गीज़र को तय समय पर चालू किया जा सकता है और काम पूरा होने पर यह अपने आप बंद हो जाता है। इससे बिजली की अनावश्यक खपत कम होती है और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
हीटरों का स्मार्ट उपयोग क्यों ज़रूरी है
स्मार्ट हीटर कमरे के तापमान के अनुसार काम करते हैं। कमरे का तापमान मनचाहे स्तर पर पहुँचने पर ये अपने आप बंद हो जाते हैं और एक निश्चित समय के बाद ऑटो-कटऑफ़ फ़ीचर भी होता है। इससे हीटर को रात भर चलाने की ज़रूरत नहीं पड़ती, जिससे बिजली की काफ़ी बचत होती है। यह तरीका न सिर्फ़ आपके पैसे बचाता है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज़ से भी बेहतर है।
पुराने उपकरणों को स्मार्ट कैसे बनाएँ
अगर आपके घर में पहले से ही कोई पुराना हीटर या गीज़र है, तो नया उपकरण खरीदना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। पुराने उपकरणों को भी स्मार्ट प्लग का इस्तेमाल करके वाई-फाई से जोड़ा जा सकता है। इससे आप अपने मोबाइल फ़ोन से टाइमर सेट कर सकते हैं और ज़रूरत न होने पर उपकरण अपने आप बंद हो जाता है। यह एक किफायती और स्मार्ट समाधान है।
रेटिंग और तापमान का सही संतुलन
नया हीटर या गीज़र खरीदते समय, बीईई रेटिंग पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। उच्च स्टार रेटिंग वाले उपकरण कम बिजली खपत करते हैं। इसके अलावा, गीज़र का तापमान 50 से 55 डिग्री सेल्सियस पर सेट करना और हीटर को मध्यम सेटिंग पर चलाना बिजली बचाने का एक आसान तरीका है। सही आदतें अपनाने से लंबे समय में बड़ा फर्क पड़ता है।