E-Shram Card Pension Scheme :महिलाओं और पुरुषों को हर महीने मिलेंगे 3000 रूपये, ऐसे करें आवेदनE

Saroj Kanwar
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E-Shram Card Pension Scheme: सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना लागू की है। इस योजना के तहत हर पात्र महिला और पुरुष को ₹3000 मासिक पेंशन दी जाएगी। यह योजना बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसमें कामगारों को नियमित रूप से एक निश्चित राशि का योगदान करना होता है। केंद्र सरकार उनके योगदान के बराबर राशि जमा करती है। यह योजना श्रमिकों के लिए भविष्य की सुरक्षा की गारंटी बन चुकी है।

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60 साल बाद शुरू होगी पेंशन सुविधाइस योजना में पेंशन की शुरुआत 60 वर्ष की आयु के बाद होती है। योजना के अनुसार, पात्र व्यक्ति को जीवन भर ₹3000 प्रति माह पेंशन मिलेगी। यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी पेंशन का 50% पारिवारिक पेंशन के रूप में पाता है। यह सुविधा पति या पत्नी में से किसी एक को मिलती है। यह प्रावधान वृद्धावस्था में स्थिर आय सुनिश्चित करता है। इससे जीवन यापन में कठिनाई नहीं होती है।स्वैच्छिक और अंशदायी योजनाप्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना पूरी तरह स्वैच्छिक और अंशदायी है। इसमें श्रमिक अपनी मर्जी और आर्थिक स्थिति के अनुसार भाग ले सकते हैं। योजना में हर महीने एक छोटी राशि जमा करनी होती है। यह राशि आयु के अनुसार निर्धारित की जाती है। इसके बदले सरकार भी उतनी ही राशि अपने खजाने से देती है। यह योजना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम है।18 से 40 वर्ष की आयु सीमाइन कामगारों को मिलेगा लाभदस्तावेज और आवश्यक कागजातआवेदन प्रक्रिया बेहद सरलयोगदान राशि उम्र पर निर्भरनिकासी और रद्द करने के नियमयोजना का व्यापक प्रभाव

60 साल बाद शुरू होगी पेंशन सुविधाइस योजना में पेंशन की शुरुआत 60 वर्ष की आयु के बाद होती है। योजना के अनुसार, पात्र व्यक्ति को जीवन भर ₹3000 प्रति माह पेंशन मिलेगी। यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी पेंशन का 50% पारिवारिक पेंशन के रूप में पाता है। यह सुविधा पति या पत्नी में से किसी एक को मिलती है। यह प्रावधान वृद्धावस्था में स्थिर आय सुनिश्चित करता है। इससे जीवन यापन में कठिनाई नहीं होती है।स्वैच्छिक और अंशदायी योजनाप्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना पूरी तरह स्वैच्छिक और अंशदायी है। इसमें श्रमिक अपनी मर्जी और आर्थिक स्थिति के अनुसार भाग ले सकते हैं। योजना में हर महीने एक छोटी राशि जमा करनी होती है। यह राशि आयु के अनुसार निर्धारित की जाती है। इसके बदले सरकार भी उतनी ही राशि अपने खजाने से देती है। यह योजना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम है।

18 से 40 वर्ष की आयु सीमा

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह सीमा इसलिए रखी गई है ताकि लंबी अवधि तक योजना में योगदान दिया जा सके। साथ ही लाभार्थी की मासिक आय ₹15000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ केवल जरूरतमंदों को मिले। पात्रता में कई असंगठित वर्ग शामिल किए गए हैं। इससे योजना की पहुंच विस्तृत हो गई है।

इन कामगारों को मिलेगा लाभ

इस योजना में दिहाड़ी मजदूर, घरेलू सहायिका, कूड़ा बीनने वाले, रिक्शा चालक, धोबी, मोची और कई अन्य वर्ग शामिल हैं। इसके अलावा कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, चमड़ा कामगार और रेहड़ी-पटरी वाले भी पात्र हैं। हालांकि जो व्यक्ति पहले से EPF, ESIC या NPS जैसी योजनाओं के सदस्य हैं, वे इसमें भाग नहीं ले सकते। इसी तरह आयकरदाता भी योजना से बाहर रखे गए हैं। यह योजना पूरी तरह असंगठित क्षेत्र पर केंद्रित है।

दस्तावेज और आवश्यक कागजात

इस योजना में शामिल होने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। इनमें आधार कार्ड, बैंक खाता पासबुक, मोबाइल नंबर और निवास प्रमाण पत्र शामिल हैं। आवेदक के पास ई-श्रम कार्ड होना अनिवार्य है। इसके बिना पंजीकरण पूरा नहीं हो सकता। दस्तावेजों की जांच के बाद ही योजना में नामांकन होता है। इससे पात्रता की पुष्टि होती है और फर्जीवाड़ा रोका जाता है।

आवेदन प्रक्रिया बेहद सरल

इस योजना में आवेदन करने के लिए व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जाना होता है। वहां आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है। इसके बाद ऑनलाइन फॉर्म भरकर पहला भुगतान नकद में किया जाता है। आगे की किस्तें बैंक खाते से ऑटो डेबिट के माध्यम से जमा होती हैं। इसके अलावा maandhan.in पोर्टल से भी पंजीकरण संभव है। पंजीकरण के बाद योजना से संबंधित कार्ड प्राप्त होता है।

योगदान राशि उम्र पर निर्भर

इस योजना में योगदान की राशि व्यक्ति की आयु के अनुसार तय होती है। यदि कोई 18 वर्ष की उम्र में योजना से जुड़ता है, तो उसे ₹55 प्रति माह देना होगा। जबकि 40 वर्ष के व्यक्ति को ₹200 प्रति माह का अंशदान करना होता है। जितनी राशि श्रमिक जमा करता है, उतनी ही सरकार भी देती है। इस योगदान प्रणाली से एक बड़ा फंड तैयार होता है। इसी से भविष्य की पेंशन सुनिश्चित की जाती है।

निकासी और रद्द करने के नियम

यदि कोई श्रमिक 10 साल से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे जमा राशि ब्याज सहित वापस मिलती है। वहीं 10 साल बाद और 60 वर्ष से पहले निकासी करने पर विशेष नियम लागू होते हैं। ऐसी स्थिति में जमा पूंजी और ब्याज की राशि वापस मिलती है। अगर लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है तो जीवनसाथी को विकल्प दिया जाता है। वह या तो योजना जारी रख सकता है या पूरी राशि ले सकता है।

योजना का व्यापक प्रभाव

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना से करोड़ों श्रमिकों को पेंशन सुविधा मिल रही है। इससे न केवल आर्थिक सुरक्षा मिलती है, बल्कि जीवन में आत्मविश्वास भी आता है। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह योजना सरकार की सामाजिक सुरक्षा नीति को मजबूत करती है। आने वाले समय में योजना को और व्यापक किया जाएगा। इससे श्रमिक वर्ग को दीर्घकालीन स्थायित्व मिलेगा।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। योजना की पात्रता, लाभ और नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं। कृपया आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल या संबंधित अधिकारी से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त करें।

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