सोयाबीन की बुवाई में गिरावट! MP से लेकर महाराष्ट्र तक किसान क्यों बदल रहे फसलें?

Saroj Kanwar
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Farming Shift: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों के खेती के पैटर्न में इस साल बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इन दोनों राज्यों में सोयाबीन की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में करीब 5% और महाराष्ट्र में लगभग 18% तक सोयाबीन की खेती कम हुई है। किसान अब मक्का, धान, हल्दी और कपास जैसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

इस बदलाव के पीछे कई वजहें सामने आई हैं। सबसे पहली वजह बाजार का असर है। बीते कुछ सालों में सोयाबीन की कीमतें उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं, जबकि मक्का, कपास और हल्दी जैसी फसलों ने किसानों को बेहतर दाम और भरोसेमंद कमाई दी। दूसरी बड़ी वजह मौसम की अनिश्चितता है। सोयाबीन की फसल बारिश पर ज्यादा निर्भर रहती है, लेकिन अनियमित मानसून और पानी की कमी से किसानों को बार-बार नुकसान उठाना पड़ा। तीसरी अहम वजह मांग और सप्लाई है।

हल्दी का इस्तेमाल दवा, मसालों और कॉस्मेटिक्स तक में होता है, वहीं मक्का इंसानी खाने से लेकर पशु चारे और उद्योगों तक काम आता है। यही कारण है कि इनकी लगातार मांग बनी हुई है।

हालांकि इस शिफ्ट से नुकसान और फायदे दोनों हो सकते हैं। नुकसान यह है कि सोयाबीन तेल उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाता है। बुवाई घटने से तेल उत्पादन पर असर पड़ेगा और आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है। इससे तेल महंगा होने की संभावना भी है। साथ ही सोयामील की सप्लाई भी घट सकती है, जो पशु चारे का अहम हिस्सा है। दूसरी तरफ फायदे यह हैं कि किसानों को फसलों में विविधता और स्थिर आय का विकल्प मिलेगा। हल्दी और कपास जैसी कैश क्रॉप्स उन्हें ज्यादा मुनाफा देंगी, जबकि मक्का और धान बारिश की स्थिति में भी ज्यादा टिकाऊ साबित होंगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में भारत का फसल पैटर्न काफी हद तक बदल सकता है। सोयाबीन का दबदबा घटेगा और हल्दी, कपास, मक्का जैसी फसलों की हिस्सेदारी बढ़ेगी। इससे किसानों की कमाई का ढांचा और बाजार की सप्लाई चेन दोनों बदल जाएंगे।

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