केंद्रीय बजट (बजट 2026) में उद्योग पर विशेष जोर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिए कई घोषणाएं की हैं। वित्त मंत्री ने अवसंरचना क्षेत्र में 12 लाख 20 हजार करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की है। इसके साथ ही देश के उद्योग पर भी विशेष जोर दिया गया है। राष्ट्रीय फाइबर योजना और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल की घोषणा की गई है। इससे क्या होगा?
1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट घोषणा में कहा कि देश में राष्ट्रीय फाइबर योजना शुरू की जाएगी, जो रेशम, ऊन, जूट जैसे उत्पादों पर काम करेगी। इसमें मानव निर्मित फाइबर और नए जमाने के फाइबर भी शामिल होंगे। इससे देश के वस्त्र उद्योग में बड़ा बदलाव आएगा।
भारत के हर कोने में विभिन्न उद्योग फैले हुए हैं। इस बजट में हस्तशिल्प पर विशेष जोर दिया गया है। राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प को विशेष महत्व दिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि ‘समर्थ 2.0’ के तहत वस्त्र उत्पादन में उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। देश में एक मेगा टेक्सटाइल हब बनाया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि देश में एक नई राष्ट्रीय फाइबर योजना (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल) शुरू की जाएगी। इस योजना में रेशम, ऊन, जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के साथ-साथ मानव निर्मित और नए प्रकार के रेशे (न्यू एज फाइबर) भी शामिल होंगे। इससे देश के वस्त्र और कपड़ा उद्योग को नई गति मिलेगी (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल)।
हथकरघा और हस्तशिल्प को विशेष महत्व (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल)
इस बार के बजट में देश के कोने-कोने में फैले हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग को विशेष महत्व दिया गया है (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल)। राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प को सहयोग देने के लिए शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थानों के साथ मिलकर काम किया जाएगा (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल)। इसके अलावा, ‘एक जिला, एक उत्पाद’ की अवधारणा के तहत प्रत्येक जिले में विशेष औद्योगिक उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल)। इसमें कलाकारों को प्रशिक्षण, कौशल विकास और उत्पादन के सभी पहलुओं में अवसर प्रदान किए जाएंगे (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल)।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल) को आत्मनिर्भर बनाना है। कलाकारों को कौशल विकास, उत्पादन और वैश्विक विपणन के सभी पहलुओं में लाभ मिलेगा। इससे देश के कलाकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी (महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल)।