मध्य प्रदेश के गांवों में पक्की सड़क का इंतजार, लोगों ने दान दी जमीन फिर भी नहीं बना रास्ता

Saroj Kanwar
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MP News: मध्य प्रदेश के कई गांव आज भी पक्की सड़कों से वंचित हैं। बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब कच्ची सड़कों पर दलदल हो जाता है। छतरपुर जिले के कई गांवों में ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए न सिर्फ मांग की, बल्कि अपनी जमीन भी दान में दी, फिर भी सड़कें नहीं बन पा रही हैं। इटौरा गांव के लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं। विधानसभा चुनाव से पहले गांववालों ने वोट का बहिष्कार भी किया था, जिसके बाद उन्हें सड़क निर्माण का आश्वासन मिला, लेकिन आज तक हालात जस के तस हैं।

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इसी तरह राधेनगर गांव के लोगों ने सड़क निर्माण के लिए खुद 10 लाख रुपए जुटाकर एक किसान की जमीन खरीदकर शासन को दान में दी। बावजूद इसके प्रशासन ने अब तक निर्माण शुरू नहीं कराया। राधेनगर और दौरिया गांवों की आबादी 2 हजार से ज्यादा है, लेकिन मुख्य सड़क से जुड़ाव नहीं होने से गांववाले परेशान हैं। गांव तक पहुंचने वाली ढाई किलोमीटर की सड़क 13 किसानों की निजी जमीन से होकर जाती है। कई किसान अपनी भूमि दान देने को तैयार हैं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दुपारिया गांव में भी हालत खराब हैं। वहां दो किलोमीटर कच्ची सड़क है जो बारिश में कीचड़ में बदल जाती है। चुनाव से पहले कलेक्टर और विधायक ने सड़क निर्माण का वादा किया था, लेकिन वह वादा भी अधूरा रह गया।

महाराजपुर तहसील के दीवान जू का पुरवा गांव में भी पक्की सड़क नहीं है। यह गांव नहर किनारे स्थित है और कच्चा रास्ता दुर्घटना का खतरा बन गया है। गांव तक आने के लिए दूसरा रास्ता मनकारी से है, लेकिन वह भी कब्जे में है।

जिलों के प्रशासन का दावा है कि जल्द ही निरीक्षण कर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। एडीएम मिलिंद नागदेवे ने कहा कि जिन गांवों में सड़क की समस्या है, वहां अधिकारियों को भेजा जाएगा और समाधान के लिए कदम उठाए जाएंगे। ग्रामीण अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके गांव भी जल्द पक्की सड़क से जुड़ जाएंगे।

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