सावन में शिव ही नहीं कार्तिकेय की भी पूजा जरूर करें-जानिए स्कंद षष्ठी का महत्व और महुरत

सावन में शिव ही नहीं कार्तिकेय की भी पूजा जरूर करें-जानिए स्कंद षष्ठी का महत्व और महुरत

 
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सावन में न सिर्फ भगवान् शिव की बल्कि गणपति और कार्तिकेय की पूजा का भी विधान है। जहां चतुर्थी तिथि गणपति को समर्पित होती है, वहीं षष्ठी तिथि में कार्तिकेय की पूजा की जाती है।कार्तिकेय भगवान शिव जी के बड़े पुत्र के रूप में पूजे जाते हैं और स्कंद षष्ठी के दिन इनका पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कार्तिकेय भगवान की पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि स्कंद षष्ठी के व्रत का पालन करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और सभी समस्याओं का समाधान होता है।

मुख्य रूप से दक्षिण भारत में भगवान् कार्तिकेय की पूजा की जाती है और जो लोग शिव जी के उपासक हैं वो कार्तिकेय जी की पूजा भी विधि विधान के साथ करते हैं। इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति के जीवन से कई कष्टों का निवारण होता है और सभी पापों से मुक्ति के द्वार खुलते हैं। इस साल षष्ठी पूजा का शुभ मुहर्त 3 अगस्त, बुधवार को सिद्ध योग: 3 अगस्त, सुबह से लेकर सायं 05: 49 मिनट तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग: 3 अगस्त, बुधवार, प्रात: 05: 43 मिनट से लेकर शाम 06: 24 मिनट तक रहेगा।अमृत सिद्धि योग: 3 अगस्त, बुधवार, प्रातः 05: 43 मिनट से लेकर प्रातः 09:51 मिनट तक रहेगा।

अमृत सिद्धि योग: सायं 06:24 मिनट से अगले दिन 04 अगस्त  प्रात: 05:44 मिनट तक रहेगा।यदि आप स्कंद षष्ठी का व्रत करते हैं तो प्रातः जल्दी उठें और दैनिक क्रियाओं से मुक्त होकर पूजन करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान कार्तिकेय की तस्वीर रखें। साथ में शिव परिवार की मूर्ति (घर पर रखें भगवान शिव की ऐसी मूर्तियां) या तस्वीर रखें और पूजन करें।

कार्तिकेय जी की तस्वीर के सामने कलश रखें और व्रत का संकल्प लें। पूजन शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करें। पूजन के समय दीपक प्रज्वलित करें और मंदिर में ज्योत जगाए रखें। भगवान कार्तिकेय पर जल अर्पित करें और पूजन करें।

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