क्या विशेष है गुप्त नवरात्रों में - गृहस्थ मनुष्य गुप्त नवरात्रि क्यों नहीं मनाते?

क्या विशेष है गुप्त नवरात्रों में - गृहस्थ मनुष्य गुप्त नवरात्रि क्यों नहीं मनाते?

 
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हिंदू धर्म में कई त्योहार मनाए जाते हैं। यूं तो भारत में सभी त्योहारों का अपना अलग महत्व है परंतु भारत में मनाया जाने वाला एक विशेष त्यौहार नवरात्रि का है जिसमें देशभर में नवरात्रि पूजन का उत्साह अलग ही नजर आता है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दौरान 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को पूजा जाता है। बता दें कि नवरात्रि साल में चार बार आती हैं।

इनमें से दो बार यह त्योहार पूरे भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, और बाकी दो बार यह गुप्त नवरात्रि होती है। गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ के महीने में मनाई जाती है। बता दें कि आषाढ़ माह की नवरात्रि इस बार 30 जून से शुरू होने वाली है। इस नवरात्रि में गुप्त विद्या की सिद्धि हेतु साधना की जाती है। इस नवरात्रि में तंत्र साधना की जाती है जो कि गुप्त होती है और इसीलिए इन नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा गया है। गुप्त नवरात्रि आमतौर पर तांत्रिक और साधकों के लिए होती है।

अघोर तांत्रिक गुप्त नवरात्रि में महाविद्यालयों को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इसलिए यह दूसरे नवरात्रि से बिल्कुल अलग होती है। गृहस्थ मनुष्य गुप्त नवरात्रि नहीं मनाते हैं।आषाढ़ माह में होने वाली गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को पूजा जाता है और इनके साथ 10 तरह की महाविद्याओं की पूजा भी की जाती है। अघोरी और तंत्र विद्या के संत दुर्गा मां के स्वरूपों  की पूजा करके अपनी महासिद्धियों को सिद्ध करते हैं।

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10 तरह की महासिद्धियों को माता के इन स्वरूपों से प्राप्त की जाती है- मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां चिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी मां मातंगी और मां कमला।  मां के इन स्वरूपों को ना केवल अघोरी पूजते हैं बल्कि बाकी के दो बार मनाए जाने वाली गृहस्थ मनुष्य के पूजन योग्य नवरात्रि में भी इन स्वरूपों को पूजा जाता है और सुख, शांति और शक्ति की प्रार्थना की जाती है।

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