Shubh -Labh - कौन हैं शुभ-लाभ? क्यों इनके चिह्नों को लगाने का है अत्यंत महत्व?

Shubh -Labh - कौन हैं शुभ-लाभ? क्यों इनके चिह्नों को लगाने का है अत्यंत महत्व?

 
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हिन्दू धर्म में शुभ-लाभ को धन, सुख-समृद्धि और वैभवता का प्रतीक माना जाता है। शुभ-लाभ का चिह्न लगाना बेहद शुभ माना जाता है। दिवाली के दिन घरों के बाहर मुख्य द्वार पर शुभ-लाभ लगाए जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि शुभ-लाभ कौन हैं और इनका इतना महत्व क्यों है। आज हम आपको शुभ-लाभ की कथा और इनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं। 

गणेश जी के हैं पुत्र 

शुभ-लाभ गणेश जी और रिद्धि एवं सिद्धि के पुत्र हैं। गणेश जी के पिता भगवान शिव के पौत्र भी हैं। गणेश जी का विवाह प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्री ऋद्धि और सिद्धि नामक दो विदुषी कन्याओं से हुआ था। गणेश जी को देवी रिद्धि से क्षेम और देवी सिद्धि से लाभ नामक दो पुत्रों की प्राप्ति हुई। क्षेम को शुभ भी कहा जाता है। लाभ का अर्थ तो सभी जानते हैं। शुभ-लाभ के चिह्नों को लोग घर में लगाते हैं। ताकि सुख-समृद्धि और धन का वास बना रहे। गणेश जी की कृपा भी बरसती रहे। 

गणेश पुराण के अनुसार शुभ और लाभ को केशं और लाभ नाम से भी जाना जाता है। इस नाम से इनकी पहचान केवल मंदिरों तक ही सीमित है। शुभ-लाभ का हिन्दू पंचांग में भी स्थान है। शुभ और लाभ का मुहूर्त भी देखा जाता है। स्वास्तिक गणेश जी का ही स्वरूप है। इसी कारण से शुभ-लाभ के चिह्न स्वास्तिक के साथ आते हैं। 

गणेश जी अपने दोनों पुत्रों शुभ और लाभ के साथ घर में विराजते हैं। स्वास्तिक चिह्न हमेशा मध्य यानी की बीच में होता है। शुभ-लाभ बाईं और दाईं तरफ होने चाहिए। शुभ-लाभ अंकित करने से रिद्धि एवं सिद्धि की भी प्राप्ति होती है। घर की उन्नति होती है, धन लाभ होता है और आय में भी वृद्धि के योग बनते हैं।alsoreadVastu - शाम के समय किसी को भी ना दे ये 5 चीजें, वर्ना हो जाएंगे कंगाल

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