क्या महिलाओ के तर्पण करने से मिलती है मुक्ति?

क्या महिलाओ के तर्पण करने से मिलती है मुक्ति?

 
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उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में सरसैया घाट पर महिलाओं ने पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया। महिलाओं द्वारा मंत्रोंच्चारण के बीच मृतक परिवार जनों को और पूर्वजों के लिए पिंडदान किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं ने कोख में मार दी गई अजन्मी बेटियों के लिए भी तर्पण किया है। इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की पौत्री नंदिता मिश्रा ने भी उनके लिए तर्पण एवं पिंडदान किया है। इसकी पहल युग दधीचि देह दान संस्था द्वारा की गई है। अजन्मी बेटियों के लिए पिछले 11 सालों से सरसैया घाट में तर्पण के कार्यक्रम का आयोजन होता आ रहा है।

अब इसमें महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सामाजिक मान्यताओं के अनुसार बेटे ही पूर्वजों को जल दे सकते हैं और उनका तर्पण व पिंडदान कर सकते हैं। लेकिन इन महिलाओं ने इस मान्यता को सरसैया घाट में तर्पण करके तोड़ने का काम किया है। ऐसा माना जाता है कि वैदिक काल में महिलाओं को तर्पण का अधिकार था। बताया जाता है कि माता-सीता ने भी अपने ससुर दशरथ का तर्पण और पिंडदान फल्गु नदी के तट पर किया था। लेकिन मध्यकाल में देश में कुरीतियां व्याप्त होने लगी और महिलाओं से उनके अधिकार छीन लिए जाते रहे।

तर्पण करने वाली महिलाओं का कहना है कि महिलाएं हर कदम में पुरुषों के साथ ताल मिलाकर चलती हैं तो महिलाओं से तर्पण का अधिकार नहीं छीना जा सकता। बता दें कि वैदिक काल में महिलाओं को तर्पण का अधिकार हासिल था। पूर्वजों और मृत परिवारीजनों के लिए महिलाएं तर्पण क्या करती थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की पौत्री नंदिता मिश्रा ने बताया कि अटल बिहारी बाजपेई उनके चाचा लगते थे और वो उनका तर्पण और पिंडदान करने के लिए आई हैं।

नंदिता मिश्रा ने बताया की वैदिक काल में महिलाओं को तर्पण करने का हक था। नंदिता उसी परंपरा को निभाने का काम कर रही हैं।कार्यक्रम के आयोजक मनोज सेंगर ने बताया कि यह संस्था 11 सालों से अजन्मी कन्याओं के लिए तर्पण के कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, और इसमें महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। अजन्मी बेटियों के लिए तर्पण करने के साथ ही यह महिलाएं अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान भी करती हैं। ऐसे में पुरुषों और महिलाओं के बीच का अंतर खत्म हो रहा है। और महिलाएं अपने हक के लिए जागरूक‌ भी हो रही हैं।

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