Chhattisgarh Tourism:छत्तीसगढ़ के 'प्रयाग' में प्रकृति से मिलिए धार्मिक पर्यटन से

Chhattisgarh Tourism:छत्तीसगढ़ के 'प्रयाग' में प्रकृति से मिलिए धार्मिक पर्यटन से

 
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यदि आप धार्मिक पर्यटन का मन बना रहे हैं तो एक बार छत्तीसगढ़ जरूर आइए। यहां आपको मंदिरों में प्रभु दर्शन के साथ प्रकृति से साक्षात्कार करने का अद्भुत अवसर भी मिलता है। गरियाबंद जिले में स्थित छत्तीसगढ़ के 'प्रयाग' में तीन नदियों के संगम के साथ राजीव लोचन मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। आसपास के क्षेत्र में मंदिरों की शृंखला है जिसमें जांजगीर-चांपा का शिवरी नारायण मंदिर, कबीरधाम का भोरमदेव मंदिर, बस्तर की दंतेश्वरी शक्तिपीठ और बलौदाबाजार जिले में सतनामी समाज के गुरु बाबा घासीदास के जन्मस्थान गिरौदपुरी धाम के दर्शन कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। इस यात्रा में प्राकृतिक संपदा से भरपूर छत्तीसगढ़ के हरे-भरे क्षेत्रों की सुंदरता निहारने के अनुभव के तो कहने ही क्या।

राजीव लोचन मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है

 गरियाबंद के उत्तर-पूर्व में महानदी के दाहिने किनारे पर स्थित है, जहाँ इसकी पैरी ओर सोंढ़ूर नामक सहायक नदियाँ इससे मिलती है। यह जिला मुख्यालयों से सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है और सड़क पर नियमित बसे चलती है। यह जिला मुख्यालय रायपुर से दक्षिण-पूर्व में 45 किलोमीटर दूर है। एक रेललाईन रायपुर-धमतरी छोटी लाईन अभनपुर से निकलती है और महानदी के बाये किनारे पर राजिम के ठीक दूसरी ओर स्थित नवापारा को जोड़ती है। राजिम के पास नदी पर एक ऊँचा पुल बन जाने से बारहमासी सड़क सम्पर्क स्थापित हो गया है।सुविधाएं – राजिम छत्तीसगढ़ में महानदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ है। इसे छत्तीसगढ़ का “प्रयाग” भी कहते हैं। यहाँ के प्रसिद्ध राजीव लोचन मंदिर में भगवान विष्णु प्रतिष्ठित हैं। प्रतिवर्ष यहाँ पर माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक एक विशाल मेला लगता है। 

यहाँ पर महानदी, पैरी नदी तथा सोंढुर नदी का संगम होने के कारण यह स्थान छत्तीसगढ़ का त्रिवेणी संगम कहलाता है। संगम के मध्य में कुलेश्वर महादेव का विशाल मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि वनवास काल में श्री राम ने इस स्थान पर अपने कुलदेवता महादेव जी की पूजा की थी। इस स्थान का प्राचीन नाम कमलक्षेत्र है। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरम्भ में भगवान विष्णु के नाभि से निकला कमल यहीं पर स्थित था और ब्रह्मा जी ने यहीं से सृष्टि की रचना की थी। इसीलिये इसका नाम कमलक्षेत्र पड़ा। राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग मानते हैं, यहाँ पैरी नदी, सोंढुर नदी और महानदी का संगम है। संगम में अस्थि विसर्जन तथा संगम किनारे पिंडदान, श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है। 

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