'I was on deathbed':बिग बॉस के कथावाचक विजय विक्रम सिंह ने शराब, अवसाद से जूझने के बारे में बात की

'I was on deathbed':बिग बॉस के कथावाचक विजय विक्रम सिंह ने शराब, अवसाद से जूझने के बारे में बात की

 
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रियलिटी शो 'बिग बॉस' को आए कई साल हो गए हैं और आलीशान घर, कंटेस्टेंट और विवादों के साथ-साथ एक चीज जो इस शो की पहचान बन गई है, वह है कथावाचक की गुमनाम आवाज।
लगता है आवाज अब इतनी गुमनाम नहीं रही,बैरिटोन के पीछे के व्यक्ति विजय विक्रम सिंह के संपर्क में आया। देश के सबसे लोकप्रिय शो में से एक का पर्यायवाची पहचान रखने के लिए मोहक लग सकता है, विजय का जीवन आसान नहीं रहा है। यह बल्कि एक कठिन रोलरकोस्टर की सवारी रही है।एक विशेष बातचीत में, विजय ने उस समय के बारे में खुलासा किया जब वह असफलताओं से मिले थे और शराब और अवसाद से इस हद तक जूझ रहे थे कि इससे उनकी जान लगभग चली गई थी।"एक आवाज कलाकार या एक अभिनेता होने के नाते कुछ ऐसा नहीं था जो मैंने अपने सपने में भी सोचा था। मैं कानपुर में एक विनम्र परिवार में पैदा हुआ था और हर मध्यम वर्ग के व्यक्ति की तरह, मेरी आकांक्षाएं भी 9 से 5 की नौकरी हासिल करने तक ही सीमित थीं। ," वह कहते हैं।

 

ठीक नहीं थी विजय विक्रम की आर्थिक स्थिति
विक्रम का जन्म कानपुर के लोवर मिडिल क्लास फैमिली में हुआ। यहीं से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। हालांकि जब ये दुनिया में आए तो परिवार सम्पन्न था लेकिन पिता के व्यापार में कुछ ऐसी परिस्थितियां आईं कि पैसे चले गए। हालांकि पढ़ाई-लिखाई में परिवार ने कोई कोताही नहीं बरती। उन्होंने विक्रम को अच्छे स्कूल में पढ़ाया। विक्रम ने भी मन लगन से स्कूल किया और फिर कॉमर्स में ग्रेजुएशन।

फौज में जाना चाहते थे विजय विक्रम
विक्रम की शुरुआत से ही इच्छा थी कि वह फौज में जाएं। एक आर्मी ऑफिसर बनें। उनके दादाजी इसके लिए उनको काफी प्रोत्साहित भी करते थे। नाम के आगे उन्होंने ब्रिगेडियर तक जोड़ दिया था। ऐसे में उनके जहन में यही था कि आगे चलकर उनको फौज में जाना है। इन्होंने प्रयास भी उसी तरफ किए। ग्रेजुएशन के साथ-साथ इन्होंने कम्बाइन्ड डिफेंस का एग्जाम भी दिया। रिटेन क्लीयर किया और इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। पांच दिन चलने वाले SSB इंटरव्यू में विक्रम पहले ही दिन रिजेक्ट हो गए। मतलब 17-18 साल से जो सपने पाले हुए थे वो एक मिनट में टूटकर बिखर गए।

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