जानिए "वन्यजीव फोटोग्राफर अवार्ड" जीतने वाली ऐश्वर्या श्रीधर कि कहानी

जानिए "वन्यजीव फोटोग्राफर अवार्ड" जीतने वाली ऐश्वर्या श्रीधर कि कहानी

 
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ऐश्वर्या श्रीधर भारत की वन्यजीव फोटोग्राफर और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर हैं। वो अब तक सैंक्चुअरी एशिया यंग नेचुरलिस्ट अवार्ड और इंटरनेशनल कैमरा फेयर जीतने वाली सबसे कम उम्र की महिला के तौर पर जानी जाती हैं। साल 2020 में ऐश्वर्या ने वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ऑफ द ईयर का अवार्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। ऐश्वर्या का जन्म एक तमिल परिवार में हुआ लेकिन वो हमेशा मुंबई में ही पली बढ़ीं हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई ‘डॉक्टर पिल्लई ग्लोबल एकेडमी’ से पूरी की। उन्होंने कैम्ब्रिज इंटरनेशनल परीक्षा में बिजनेस स्टडीज के पेपर में वर्ल्ड टॉपर रहीं।

इसके बाद उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से मास मीडिया विषय में ग्रेजुएशन पूरा किया।इसके अलावा ऐश्वर्या बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा स्टेट वेटलैंड आइडेंटिफिकेशन कमेटी की सदस्य के रूप में काम करती हैं।बचपन से ही ऐश्वर्या श्रीधर कुदरती खूबसूरती को देखना चाहती थीं,यही कारण है कि उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में भी अपना भरपूर योगदान दिया। इस प्रोफेशन में उनके माता-पिता ने भी भरपूर साथ दिया। ऐश्वर्या श्रीधर को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिल चुके हैं हैं, जिसमें ‘डायना अवार्ड’ और ‘वुमन आइकॉन इंडिया अवार्ड’ शामिल हैं।

ऐश्वर्या श्रीधर के पिता जी बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के मेंबर हैं, जिस वजह से वो अपने पिता के साथ घूमने जाया करती थीं। तब वो महज 11 साल की थीं जब उन्हें पहली बार फोटोग्राफी का शौक लगा। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने जनसंचार विषय से ग्रेजुएशन पूरा किया।फोटोग्राफर होने के साथ-साथ ऐश्वर्या एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर भी हैं। बता दें कि उनकी पहली वृत्तचित्र ‘पंजे द लॉस्ट वेटलैंड को डीडी नेशनल पर दिखाया जा चुका है।

इसके अलावा उन्होंने माया नामक एक जंगली बंगाल बाघिन पर ‘द क्वीन ऑफ तारू’ नामक एक फीचर फिल्म भी बनाई है। जिसे न्यूयॉर्क के 9वें वन्यजीव संरक्षण फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ शौकिया फिल्म का पुरस्कार दिया जा चुका है। ऐश्वर्या उन महिलाओं के लिए किसी इंस्पिरेशन से कम नहीं हैं, जिन्हें अपना पैशन फॉलो करना है।

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