बॉडी में मौजूद ये चीजे बढ़ाती है टाइप -2 डायबिटीज का खतरा जानिए आप भी

बॉडी में मौजूद ये चीजे बढ़ाती है टाइप -2 डायबिटीज का खतरा जानिए आप भी

 
DIABETES

हम में से ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल होता है की आखिर डायबिटीज की सबसे बड़ी वजह क्या है बहुत से लोग इसे लाइफस्टाइल से जुड़ा विकार मानते है और बहुत से लोग इसे अनहेल्दी आदतों की वजह से होने वाली परेशानी मानते है हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों सहित दुनियाभर के अलग -अलग देशों के वैज्ञानिकों ने एक वैश्विक अध्धयन में इस बात पर विचार किया की कैसे हमारे जीन टाइप -2 डायबिटीज में योगदान देते है 

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नेचर जेनेटिक में प्रकाशित डायबिटीज मेटा एनालिसिस ऑफ ट्रांस एथनिक एसोसिएशन स्टडी के इस अध्धयन को यूनिवर्सिटी ऑफ मेनचेस्टर के प्रोफेसर और अध्धयन के सह मुख्य लेखक एंड्र्यू  मोरिस ने किया है 
पिछले 3 दशक से ज्यादा समय में टाइप 2 डायबिटीज का वैश्विक दर चार गुना तक हो गई है टाइप 2 डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण दूसरी बीमारियां आपकी जान के लिए मुसीबत बन सकती है डायबिटीज के सबसे ज्यादा मामले इंडिया और चीन सहित एशिया से सामने आते है 
कई अध्धयन में यह साफ हो चूका है कि इंडिया टाइप -2 डायबिटीज के प्रति सबसे ज्यादा संवेनशील होते है क्योकिं यहां रहने वाले लोग ज्यादातर पेट और कमर के आस -पास चर्बी जैसी समस्या से ग्रस्त होते है जो उनके पेट के अंगों पर जमा फैट को दर्शाता है इतना ही नहीं भारतीय जन्म से ही इन्सुलिन रेजिस्टेंट होते है ये स्थित यूरोपीय देशों के ठीक विपरीत है जहां लोग जरूरत से ज्यादा वजन से ग्रस्त है 

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इंडिया के इस अध्धयन के मुख्य शोधकर्ता और CSIR के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिकुलर बायोलॉजी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ गिरिराज आर चंडाक ने इस अध्धयन को एक ऐतिहासिक क्षण करार दिया जिसमें दुनियाभर के वैज्ञानिक साथ मिलकर अलग -अलग आबादी में टाइप -2 डायबिटीज को लेकर जेनेटिक संदिघ्ता में विभिन्नताएं और समानताएं को बेहतर तरिके से समझने कि दिशा में आगे बढ़ रहे है 
हाल ही में हुए इस अध्धयन में यूरोपीय ,पूर्वी एशियाई दक्षिण एशियाई अफ़्रीकी जैसे जातीय समूहों के 11.6 लाख हेल्दी लोगों के जीनोमिक DNA के तुलना 1.8 लाख टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगो से कि गई 


 

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