क्या आप जो दूध पी रहे है उस दूध में है लम्पी वायरस का असर? जानिए क्या है सच?

क्या आप जो दूध पी रहे है उस दूध में है लम्पी वायरस का असर? जानिए क्या है सच?

 
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लम्पी वायरस का संक्रमण गाय के जीवन के लिए खतरनाक है। इसके साथ इसका असर गाय के दूध और गोमूत्र और गोबर पर भी देखने को मिल रहा है।उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में लम्पी वायरस का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है, वहीं इसका सीधा असर गाय के दूध और इसके उत्पादन में देखने को मिल रहा है।लम्पी वायरस अब तक उत्तर प्रदेश के 25 जिलों में पहुंच चुका है, इसका सबसे ज्यादा असर मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और अलीगढ़ में देखने को मिल रहा है।राज्य में 15 लाख से ज्यादा मवेशी इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से 25 हजार सीधे तौर पर संक्रमित हैं।

67000 Cattle Dead of 'Lumpy Skin Virus', Indigenous Vaccine Prepared to  Cure 'Gau-Mata' - Sentinelassam

गाय के दूध में मौजूद वायरस को  खत्म किया जा सकता है। इसके लिए दूध को ज्यादा देर तक उबालना होगा वरना पाश्चुरीकरण के जरिए इस्तेमाल किया गया दूध किसी भी तरह से हानिकारक नहीं होता, क्योंकि यह वायरस को पूरी तरह से नष्ट कर देता है। मनुष्य के लिए इसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं बचा है, लेकिन अगर इस दूध का सेवन गाय के बच्चे द्वारा किया जाता है, तो यह उसके लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में मवेशियों के बच्चे को अलग कर देना चाहिए।

दूसरी ओर, लम्पी वायरस के कारण एक गाय की मृत्यु दर कम होती है, लेकिन यह सीधे उसके दूध उत्पादन और उसके गर्भाशय को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोग दूध के उत्पादन को प्रभावित करता है, जो 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। यह रोग आर्थिक हानि का रोग है। इसमें मृत्यु दर 1 से 2 प्रतिशत है।गोमूत्र या गोबर का काम करने वाले या प्रयोग करने वालों पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन ध्यान रहे कि वे इस वायरस के वाहक न बनें।

ढेलेदार वायरस इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं है, यह जानवर से जानवर में फैलता है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यदि पशु की स्वाद कलिका को नीम या हल्दी और घी के लेप से लगाया जाए तो घाव भरना बंद हो सकता है और इस रोग से पीड़ित पशु 1 सप्ताह से 10 दिन में ठीक हो सकते हैं, लेकिन इससे छुटकारा पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण तरीका टीकाकरण है, जिससे इसके संक्रमण को तेजी से रोका जा सकता है।

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