Ahad Ahmed Struggle Story - पिता पंचर बनाते हैं , बेटा जज बन गया , पहले प्रयास में मिली सफलता

Ahad Ahmed Struggle Story - पिता पंचर बनाते हैं , बेटा जज बन गया , पहले प्रयास में मिली सफलता

 
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अफसाना का पति साईकिल रिपेयरिंग से इतना नहीं कमा पाते थे कि परिवार के खर्च के साथ बच्चों को पढ़ाया जा सके। इसलिए अफसाना ने सिलाई का काम शुरू किया , जो पैसे आए उससे अपने बच्चों को पढ़ाया। बेटे ने पहले ही प्रयास में PCS-J की परीक्षा पास कर ली। रिजल्ट आया तो उसने मां से कहा- ‘मां, मैं जज बन गया।’ 

35 साल से घर में साईकिल रिपेयरिंग की दुकान

प्रयागराज से करीब 30 किमी दूरी पर बरई हरख गांव है। यहां शहजाद अहमद अपनी पत्नी अफसाना और तीन बच्चों के साथ रहते हैं। घर के पास ही उनकी साईकिल रिपेयरिंग की दुकान है। अफसाना ने बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा संभाला। वे गांव की महिलाओं का कपड़ा सिलने लगीं। इससे जो कमाई होती वह उससे अपने बच्चों की फीस जमा करती थीं। बड़े बेटे ने पढ़ाई करके प्राइवेट नौकरी ज्वॉइन कर ली।

8वीं के बाद अहद ने घर छोड़ दिया

अफसाना ने अपने दूसरे नंबर के बेटे अहद अहमद का नाम गांव के ही स्कूल में लिखवाया था। 8वीं तक पढ़ाई के बाद अहद ने कहा कि उन्हें पढ़ाई के लिए प्रयागराज जाना है। उन्होंने बेटे को प्रयागराज भेज दिया। अहद ने वहां गवर्नमेंट इंटर कॉलेज में अपना नाम लिखवाया। BA , LLB करने के बाद अहद प्रयागराज से वापस अपने घर आ गए। 

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रिजल्ट आया तो मां से कहा- मां, मैं जज बन गया

30 अगस्त की शाम यूपी लोक सेवा आयोग ने रिजल्ट जारी कर दिया। अहद ने रिजल्ट नहीं देखा क्योंकि उन्होंने तय किया था कि जब पास हो जाऊंगा तो कोई न कोई दोस्त फोन जरूर करेगा। एक दोस्त ने फोन किया और बताया कि तुम पास हो गए। तुम्हारी 157वीं रैंक आई है।  वह सबसे पहले अपनी मां के पास पहुंचे और कहा- मां मैं जज बन गया।

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