तेल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और खाद्य पदार्थों का भाव बढ़ेगा, आम आदमी के लिए आ गई है बड़ी मुसीबत

तेल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और खाद्य पदार्थों का भाव बढ़ेगा, आम आदमी के लिए आ गई है बड़ी मुसीबत

 
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गुरुवार को रुपया एक बार फिर अपने पिछले निचले स्तर को तोड़कर नए स्तर पर पहुंच गया। रुपये की यह कमजोरी सभी को प्रभावित करेगी चाहे वह गांव में रहे या शहर में।  डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी की वजह दरअसल कल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी है। इतना ही नहीं, यूरो और स्टर्लिंग सहित छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 111.65 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।  फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और रूस और रूस-यूक्रेन के बीच तनाव के और बढ़ने पर प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में तेजी आई।

अन्य एशियाई मुद्राओं की तरह रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपये में गिरावट का मौजूदा चलन घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के बाद भी जारी रह सकता है। रुपये में कमजोरी के बढ़ने से आम आदमी की परेशानी भी बढ़ेगी। इसका कारण यह है कि हमारा देश कई चीजों के लिए आयात पर निर्भर है। अधिकांश आयात-निर्यात अमेरिकी डॉलर में ही किया जाता है, इसलिए बाहरी देशों से कुछ भी खरीदने के लिए हमें काफी रुपये खर्च करने होंगे। हम अपनी ईंधन आवश्यकता का लगभग 80 प्रतिशत आयात करते हैं, अर्थात कच्चा तेल और कोयला।

यूक्रेन संकट के बाद कच्चा तेल महंगा हो गया है। इससे आयात महंगा हो गया और व्यापार घाटा बढ़ गया। कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाए रखेगा और अल्पावधि में घरेलू उत्पादन और जीडीपी को नुकसान पहुंचाएगा। अधिकांश मोबाइल और गैजेट चीन और अन्य पूर्वी एशियाई शहरों से आयात किए जाते हैं और अधिकांश कारोबार डॉलर में होता है। विदेशों से आयात होने के कारण इनकी कीमतों में इजाफा होना तय है।मतलब मोबाइल और दूसरे गैजेट्स पर महंगाई बढ़ेगी और आपको ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। आपके किचन में इस्तेमाल होने वाला सरसों और रिफाइंड तेल सब महंगा हो जाएगा। इसके अलावा सभी पैकेज्ड आइटम जिनमें खाद्य तेल का इस्तेमाल होता है। रुपये के मूल्य में गिरावट होने पर मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है। महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई को ब्याज दरें बढ़ानी होंगी।

महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने पिछले चार महीने में ब्याज दरों में 1.4 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इससे कर्जदारों की ईएमआई बढ़ गई है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज बढ़ाने के बाद आरबीआई को भी दरें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है। इससे कर्ज महंगा हो जाता है।  रियल एस्टेट सेक्टर पर रोजगार सृजन पर अंकुश लगाने का दबाव बढ़ गया है।  महंगाई पर काबू पाने के उपायों से अर्थव्यवस्था का पहिया रुक जाएगा। देश का व्यापार घाटा भी बढ़ गया है। जून में देश का व्यापार घाटा 26.18 अरब डॉलर रहा। भले ही इस अवधि में देश के निर्यात में 23.5% की वृद्धि हुई है।  इसकी तुलना में आयात कहीं ज्यादा बढ़ा है। जून 2022 में देश का आयात साल-दर-साल 57.55 फीसदी बढ़ा है। ऐसे में व्यापार घाटा भी बढ़ा है। जून 2021 में भारत का व्यापार घाटा महज 9.60 अरब डॉलर था।

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