देश को 2027 में मिलेगी पहली महिला मुख्य न्यायाधीश

देश को 2027 में मिलेगी पहली महिला मुख्य न्यायाधीश

 
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से दो दिनों के भीतर दो बड़े फैसले आए। पहला नोटबंदी और दूसरा अभिव्यक्ति की आजादी के मामले पर बड़ा फैसला आया। नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार के फैसले को सही माना। वहीं आज यानी मंगलवार कोर्ट ने कहा कि किसी मंत्री, सांसद या विधायक के बयान के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इन दो फैसलों की काफी चर्चा है और इस चर्चा के बीच एक नाम जस्टिस बीवी नागरत्ना का भी है। इन दोनों ही फैसलों में जस्टिस नागरत्ना की राय पीठ के दूसरे जजों से अलग थी। जस्टिस नागरत्ना की ओर से पूर्व में कई ऐसी टिप्पणी और फैसले ऐसे हैं जिसकी चर्चा पहले भी होती रही है। शांत व्यवहार और शक्तिशाली शब्दों के लिए बीवी नागरत्ना को जाना जाता है। 2027 में जस्टिस बीवी नागरत्ना भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस होंगी। Sara Khadeem Iran:बेहद खूबसूरत ही नहीं, निडर भी है ईरान की यह शतरंज खिलाड़ी

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ एक महिला जज
सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में केवल एकमात्र महिला न्यायाधीश जस्टिस इंदिरा बनर्जी हैं, जो 2022 में रिटायर्ड हो रही हैं। अब तक शीर्ष अदालत में केवल आठ महिला न्यायाधीश हुई हैं। भारत में  महिला मुख्य न्यायाधीश की मांग बहुत पहले से होती रही है। अप्रैल में पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा था किभारत के लिए एक महिला मुख्य न्यायाधीश होने का समय आ गया है।

नाजायज संतान को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी
कर्नाटक हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान नाजायज संतान को लेकर जस्टिस बी वी नागरत्ना ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि कानून को इस तथ्य को मान्यता देनी चाहिए कि नाजायज माता-पिता हो सकते हैं, लेकिन उनसे पैदा होने वाली संतान नहीं। जस्टिस बी वी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने कहा कि बिना माता-पिता के इस दुनिया में किसी बच्चे का जन्म नहीं हो सकता है।

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