द्रोपदी मुर्मू के लिए सबसे बड़ा झटका- उनके बड़े बेटे की मौत

द्रोपदी मुर्मू के लिए सबसे बड़ा झटका- उनके बड़े बेटे की मौत

 
.

ओडिशा में स्थित पहाड़पुर नामक एक गांव से है भारत की नई राष्ट्रपति घोषित की गई द्रौपदी मुर्मू। पहाड़पुर से करीब 2.5 किलोमीटर अंदर दाखिल होने पर एक स्कूल है जिसका  नाम- श्याम, लक्ष्मण, शिपुन उच्च प्राथमिक आवासीय विद्यालय है। कभी यहां एक घर था। वही घर जहां 42 साल पहले देश की होने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दुल्हन बनकर आईं थीं। द्रोपदी के जीवन के सबसे बड़े हादसा था उनके बड़े बेटे की मौत।

बड़े बेटे की मौत के बाद द्रौपदी 6 महीने तक डिप्रेशन में थी। बड़े बेटे की मौत से द्रोपदी को उभरने में काफी समय लग गया लेकिन वही द्रौपदी जब छोटे बेटे की मौत हुई, तब उस कठिन मुसीबत का सामना करने लगी। द्रौपदी हर रोज सुबह 3.30 बजे बिस्तर छोड़ देती थीं। वह कितनी भी व्यस्त रहें, लेकिन ध्यान, सुबह की सैर और योग कभी नहीं छोड़ती थीं। द्रौपदी बचपन से ही दृढ़ और सच के साथ मजबूती से डटे रहने वाली रही हैं।

एक किस्सा याद करते हुए मुर्मू को पढ़ाने वाले बासुदेव बेहरा कहते हैं, 'वो क्लास टॉपर थीं। हमेशा सबसे ज्यादा नंबर उन्हीं के आते थे। साल 2017 में जब मुर्मू झारखंड की राज्यपाल थीं तब भाजपा की सरकार सीएनटी-एसपीटी संशोधन विधेयक लेकर आई थीं। तब मुर्मू ने उस विधेयक को वापस कर दिया था। उन्होंने आदिवासियों के हित को दरकिनार करने और इस बिल के मकसद पर सवाल उठाए थे।

आज ओडिशा का पहाड़पुर गांव के एंट्री गेट पर बैनर लगा है जिसके दोनों तरफ द्रौपदी मुर्मू की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी हैं। लिखा है- राष्ट्रपति पद की प्रार्थिनी द्रौपदी मुर्मू, पहाड़पुर गांव आपका स्वागत करता है। यहीं पर एक बड़ी सी प्रतिमा लगी है, जो द्रौपदी के पति की है। जिस पर ओडिशा के दो महान कवियों सच्चिदानंद और सरला दास की कविता की पंक्तियां उकेरी हुई हैं। द्रौपदी झारखंड के ही नहीं बल्कि पूरे देश की शान बन चुकी है।

From Around the web