Tata Titan Tanishq: दुनिया की सबसे बड़ी ब्रांड एक बार हुई थी फेल,एक आइडिया से वापस आई उपर

Tata Titan Tanishq: दुनिया की सबसे बड़ी ब्रांड एक बार हुई थी फेल,एक आइडिया से वापस आई उपर

 
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आज हम जिस ब्रांड की बात कर रहे थे, 24-25 साल पहले उसके बड़े-बड़े स्टोर भी खुल गए थे, बेहतरीन ढंग से डिजाइन किए गए आभूषणों का प्रदर्शन किया गया था, उन दुकानों में ग्राहकों के साथ पूरी तरह तिरस्कार का व्यवहार करने वाले अधिकारी थे, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ब्रांड के साथ टाटा परिवार का नाम भी जुड़ा। लेकिन कोई बात नहीं बन रही थी। थक हार कर सब कुछ समेटने का ख्याल आने लगा। लेकिन तभी एक आइडिया आया और सब कुछ बदल गया। तनिष्क ब्रांड, जिसने भारत में सबसे पहले ब्रांडेड ज्वैलरी पेश की थी, बच गया।

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टाइटन कंपनी लिमिटेड

टाइटन कंपनी लिमिटेड के इस ब्रांड के आज देशभर में करीब 500 स्टोर हैं। इस साल 1 जुलाई से टाइटन 52 फीसदी चढ़ा है। आज इस टाइटन कंपनी की पहचान भले ही तनिष्क और इंडियन और वेस्टर्न लुक के गहनों से हो, लेकिन एक जमाने में यह सिर्फ घड़ियां ही बनाती थी।टाइटन की शुरुआत 1984 में हुई थी। उन दिनों इसका नाम टाइटन इंडस्ट्रीज था। इसे टाटा समूह और तमिलनाडु सरकार ने संयुक्त रूप से शुरू किया था। टाइटन की घड़ियों की शुरुआत 1987 में हुई थी। उन दिनों एचएमटी घड़ियों का चलन था। लेकिन टाइटन के सामने सरकारी कंपनी फीकी पड़ने लगी।

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टाइटन की घड़ियाँ

वास्तव में टाइटन की घड़ियों का उन दिनों बड़ा अलग पहलू था। न केवल डिजाइन बेहतर थे, घड़ियों को एकदम नई क्वार्ट्ज तकनीक से बनाया जा रहा था।वह 1990-91 का दौर था। देश आर्थिक संकटों में घिर गया। विदेशी कर्ज 70 अरब डॉलर को पार कर गया था और देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6 अरब डॉलर से भी कम था। विचार आया कि क्यों न टाइटन भी अन्य अंतरराष्ट्रीय घड़ी ब्रांडों की तरह आभूषणों का निर्माण और निर्यात करता है। टाइटन इंडस्ट्रीज ने तमिलनाडु के होसुर में एक कारखाना स्थापित किया।

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सोने और ब्रांडेड ज्वैलरी के कारोबार में उतरी

वह सोने और ब्रांडेड ज्वैलरी के कारोबार में उतरी। लेकिन कुछ ही साल बीते थे कि अमेरिका और यूरोप के ज्वैलरी मार्केट का पैटर्न बदलने लगा। उपभोक्ता अपनी मुट्ठी बंद करके सोने की प्लेट वाली घड़ियों के बजाय सस्ती घड़ियों की ओर रुख करने लगे। टाइटन के लिए यूरोप और अमेरिकी बाजारों में कारोबार धीमा होने लगा।ऐसे में कंपनी ने भारतीय बाजार का रुख किया। भारत में पारंपरिक आभूषण व्यवसाय को देखते हुए टाटा समूह शुरू में इस सेगमेंट में उद्यम करने से हिचक रहा था।

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