Make In India के तहत भारत बना रहा है मिसाइल का 'दिमाग', अब दुनिया देखेगी भारत की ताकत

Make In India के तहत भारत बना रहा है मिसाइल का 'दिमाग', अब दुनिया देखेगी भारत की ताकत

 
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मेक इन इंडिया के तहत मिसाइल का दिमाग यानी "फेज कंट्रोल मॉड्यूल" पहली बार भारत के साथ-साथ दुनिया को भी अपनी ताकत दिखाएगा। यह तकनीक मिसाइलों पर कड़ी निगरानी रखकर भारत में दुश्मनों के मंसूबों को तबाह कर रही है। जिसके बाद अब यह आर्मेनिया, पोलैंड और वियतनाम जैसे देशों की अभेद्य दीवार बनने के लिए तैयार है।  फेज कंट्रोल मॉड्यूल तकनीक छड़ और चिप्स का एक सेट है जो दुश्मन की मिसाइलों को ट्रैक करता है और अपनी मिसाइलों की निगरानी करता है। यह अपना खुद का संकेत उत्पन्न करता है, सभी संकेत एक साथ एक किरण बन जाते हैं और फिर इस किरण को प्रेषित किया जाता है ताकि दुश्मन की मिसाइल का पता लगाया जा सके।

आपको बता दें कि इसका इस्तेमाल वायुसेना, वाणिज्यिक जहाजों और पहाड़ी इलाकों में भी किया जाता है। यह तकनीक भारत की सभी प्रमुख मिसाइलों में मौजूद है। भारत ऐसी प्रणाली रखने वाले दुनिया के तीन चुनिंदा देशों में से एक है। इस तकनीक की सफलता को देखकर आर्मेनिया और पोलैंड इसे यहां लाए हैं। और चीन सीमा के पास वियतनाम ने भी इस तकनीक में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।  इस तकनीक को गहराई से विकसित किया गया है।  जब भी जरूरत पड़ी, निर्यात के लिए संबंधित उपक्रमों को इसकी आपूर्ति की गई है।

इतना ही नहीं, तापमान के हिसाब से इसकी बराबर जांच हो जाती है। भारत सरकार का उपक्रम सीईएल यानी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस खास तकनीक के जरिए फेज कंट्रोल मॉड्यूल टेक्नोलॉजी का निर्माण कर रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक्स-बैंड को प्रसारित करती है, जो दुनिया की सबसे अनूठी तकनीकों में से एक है। संदिग्ध आवृत्ति को तुरंत एक्स-बैंड के माध्यम से चिह्नित किया जाता है और मिसाइल की दिशा तेज हो जाती है। यह तकनीक पाउडर से चिप युक्त उत्पाद में बदल जाती है, जिसके बाद इसे मिसाइल सिस्टम के रडार पर लगाया जाता है।

इतना ही नहीं, इसका गुणवत्ता परीक्षण कश्मीर, राजस्थान, कन्याकुमारी, आंध्र प्रदेश, पोलैंड, आर्मेनिया और वियतनाम के तापमान में किया जाता है।  एक रडार प्रणाली में 5000 पीसीएम फेस कंट्रोल मॉड्यूल होते हैं। इसे कमांड और बिना कमांड स्टाइल दोनों के तहत विकसित किया जा रहा है। इस तकनीक का इस्तेमाल वेपन लोकेटिंग रडार, फ्लाइट लेवल रडार, ट्रूप लेवल रडार में किया जाता है। यह पहले डेवेलपमेन्ट फेज में था, 2022 से फेज कंट्रोल मॉड्यूल प्रौद्योगिकी पूर्ण उत्पादन में है। यह भारत की गौरव आकाश मिसाइल के राजेंद्र रडार का भी हिस्सा है। आने वाले दिनों में उत्पादन क्षमता और उत्पाद की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि विश्व में भारत का गौरव कायम रहे।

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