Gold - RBI के पूर्व गवर्नर ने बताया सोने का सच , जाने 46 टन सोना भारत से बाहर भेजने का सच

Gold - RBI के पूर्व गवर्नर ने बताया सोने का सच , जाने 46 टन सोना भारत से बाहर भेजने का सच

 
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आरबीआई के पूर्व गवर्नर डॉ. सी. रंगराजन ने हाल ही में अपनी नई पुस्तक फोर्क्स इन द रोड प्रकाशित की है। उन्होंने अपनी किताब में कहा कि जनवरी 1991 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.2 बिलियन डॉलर था और जून तक आधे से कम हो गया था। भारत सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 2.2 बिलियन डॉलर के आपातकालीन ऋण को सुरक्षित करने के लिए भारत से 46 टन सोना देश से बाहर भेजना पड़ा था। कई लोगों के घर में स्थिति की गंभीरता आ गई थी। 

राष्ट्रीय भावना हुई आहात

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भारतीय रिजर्व बैंक को 500 मिलियन डॉलर जुटाने के लिए 46 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड को देना पड़ा था। सोना ले जा रही वैन टायर फटने से रास्ते में ही टूट गई। इसके बाद हड़कंप मच गया। जब यह पता चला कि सरकार ने ऋण के खिलाफ देश के पूरे सोने के भंडार को गिरवी रख दिया है तो राष्ट्रीय भावनाएं आक्रोशित हो गईं और लोगों में आक्रोश फैल गया। 

गिर गई थी चंद्रशेखर सरकार

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एक चार्टर्ड विमान 21 मई और 31 मई 1991 के बीच कीमती माल को लंदन ले गया जिसने देश को आर्थिक नींद से बाहर कर दिया।  कुछ महीने बाद चंद्रशेखर सरकार गिर गई थी। पी वी नरसिम्हा राव ने जून में प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला और मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया। 

राष्ट्र को भेजा गया था संकेत

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प्रधानमंत्री राव के शपथ लेते ही पहले ही राष्ट्र को एक संकेत भेज दिया गया है। राव ने राष्ट्र के नाम एक भाषण में अपनी टिप्पणी कर कहा था कि उदारीकरण की नीतियों की शुरुआत के साथ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ना शुरू हो गया। और 13 नवंबर 2020 तक 530.268 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। 

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