Cheetah project: प्रधानमंत्री बोले एक बार फिर भारत की धरती पर लौट आए है चीते, जानिए कहा से आ रहे है ये चीते

Cheetah project: प्रधानमंत्री बोले एक बार फिर भारत की धरती पर लौट आए है चीते, जानिए कहा से आ रहे है ये चीते

 
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सात दशकों के बाद देश में आज से एक बार फिर चीता युग की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत आए चीतों को कुनो नेशनल पार्क में छोड़ गए हैं। इस दौरान वह खुद हाथ में डीएसएलआर लिए चीतों की तस्वीरें लेते नजर आए। चितो कोंडेखने के बाद पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधित किया। उन्होंने इस संबोधन में कहा कि एक बार फिर चीते भारत की धरती पर लौट आए हैं। इसके लिए नामीबिया की सरकार को धन्यवाद और सभी देशवासियों को बधाई।नामीबिया से आए 8 चीतों में से। 5 मादा हैं जबकि 3 नर चीते हैं।

मादा चीतों की उम्र 2 से 5 साल के बीच होती है जबकि नर चीतों की उम्र 4.5 से 5.5 साल के बीच होती है।भारत में 70 साल पहले चीता को विलुप्त घोषित किया गया था।मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के लिए एक हेलीपैड भी बनाया गया था। ।मध्य प्रदेश का कुनो राष्ट्रीय उद्यान विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर स्थित है।2018 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था।पीएम मोदी ने आज अपने बाड़े में 8 चीतों को पिंजरे से रिहा किया।सभी चीतों के गले में एक सैटेलाइट-वीएचएफ रेडियो कॉलर आईडी मौजूद होती है, जिसकी मदद से उन्हें भविष्य में निगरानी से लेकर संक्रमण तक पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

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चीतों के लिए 25 वर्ग किलोमीटर का विशेष घेरा बनाया गया है। चीतों को यहां की भारतीय जलवायु के अनुकूल होने में एक से तीन महीने का समय लग सकता है।चीता सप्ताह में एक बार ही शिकार करता है और ऐसे ही उसका काम चलता है। चीता एक बार में 7 से 8 किलो मटन खा लेता है।चीता को अधिक शक्तिशाली माना जाता है और इसीलिए इसके शिकार में किसी का भी हाथ नहीं होता है।चीते को पर्याप्त जगह की जरूरत होती है क्योंकि यह 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से जमीन पर सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर है। जो महज 3 सेकेंड में 97 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है।

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चीता बिल्ली की प्रजाति का जानवर है लेकिन चीता शेर और बाघ की तरह दहाड़ नहीं सकता लेकिन बिल्ली की तरह गुर्राता है।चीता भारत में आखिरी बार 1948 में देखा गया था।भारत के विभिन्न राज्यों के जंगल चीतों के घर थे। लेकिन पालन और शिकार के कारण देश में चीतों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।वर्ष 1947 में सरगुजा के राजा रामानुज प्रताप सिंह ने 3 चीतों का शिकार किया। ऐसा माना जाता है कि ये भारत के अंतिम 3 चीते थे। अब 8 चीते भारत पहुंच रहे हैं।ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी मांसाहारी जानवर को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में भेजा जा रहा है।

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