ब्लूमबर्ग का दावा ,मेक इन इंडिया के चलते सेना ,वायुसेना ,नौसेना में हतियारो की कमी का खतरा

ब्लूमबर्ग का दावा ,मेक इन इंडिया के चलते सेना ,वायुसेना ,नौसेना में हतियारो की कमी का खतरा

 
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साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने मेक इन इंडिया को तरजीह देना शुरू किया। सरकार ने मोबाईल फोन से लेकर रक्षा क्षेत्र में हथियार बनने तक जोर दिया। इसका लक्ष्य देश में ज्यादा रोजगार पैदा करना और विदेशी मुदा को देश से बाहर जाने से रोकना था। लेकिन 8 साल बाद मिलिट्री हार्डवेयर का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक अभी भी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त हथियार नहीं पा रहा है और साथ ही सरकारी नियम आयात को रोक रहे है।

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खबरों के अनुसार इस मामले से जुड़े अधिकारियो ने इसकी जानकारी दी है।अधिकारियो ने बताया की भारत की आर्मी इंडियन नेवई और एयरफोर्स पुराने पड़े हथियारों को बदलने के लिए जरुरी हथियार आयात नहीं कर पा रही है। इसके कारन 2016 तक भारत के पास हेलिकॉप्टर्स की कमी हो सकती है और 2013 तक लड़ाकू विमानों की कमी हो सकती है।  

वही पीएम मोदी के मुताबित 30 से 60 फीसदी तक कलपुर्जे को देश में बनाना होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है की सैन्य खरीद किसी है और इसे कहा से खरीदा जा सकता है। वही इसके पहले ऐसी कोई सिमा निर्धारित नहीं थी और फिर भारत ने रक्षा खरीद की लगत कम करने के लिए घरेलू स्तर पर निर्माण का तंत्र इस्तेमाल किया। पहले ऐसी कोई सिमा निर्धारित नहीं थी और फिर भारत ने रक्षा की लागत कम करने के लिए घरेलू स्तर पर निर्माण का तंत्र इस्तेमाल किया। 

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