फ्लॉप होने के बाद भी करोड़ों कमाती है है बॉलीवुड फिल्म जानिए कैसे

फ्लॉप होने के बाद भी करोड़ों कमाती है है बॉलीवुड फिल्म जानिए कैसे

 
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क्या आपने कभी सोचा है कि इस साल एक के बाद एक बॉलीवुड फिल्में बॉक्स ऑफिस पर गिरी हैं, लेकिन हर महीने इतनी ही फिल्मों की घोषणा हो रही है और फिल्में रिलीज भी हो रही हैं। लेकिन, मजेदार बात यह है कि फ्लॉप फिल्में भी नुकसान में नहीं हैं।आज हम आपको बॉलीवुड बिजनेस की पूरी स्ट्रैटेजी बताएंगे।फिल्म ने कितना कलेक्शन किया है, उसके आधार पर यह तय होता है कि फिल्म हिट है या फ्लॉप, लेकिन फ्लॉप फिल्में निवेश की गई रकम भी वसूल कर लेती हैं।दरअसल प्रोड्यूसर्स रिलीज से पहले फिल्मों के राइट्स बेच देते हैं।

फिल्में म्यूजिक राइट्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म राइट्स, सैटेलाइट राइट्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स राइट्स से अपना पैसा कमाती हैं। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म शमशेरा बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई थी, लेकिन रिलीज से पहले ही प्रोडक्शन हाउस ने प्री-सेल के जरिए अपना निवेश वसूल कर लिया था।राज बंसल के मुताबिक फ्लॉप फिल्मों का नुकसान अभिनेता, निर्माता नहीं बल्कि वितरकों को झेलना पड़ता है। जो लोग रिलीज से पहले फिल्मों के सारे अधिकार खरीद लेते हैं, उन्हें फ्लॉप फिल्मों का नुकसान उठाना पड़ता है।फिल्में दो तरह से बिकती हैं।

The 100 Crore Flops – Welcome to Bollywood

पहला है एडवांस, दूसरा है न्यूनतम गारंटी।राज बंसल के मुताबिक, फिल्म रिलीज होने से पहले डिस्ट्रीब्यूटर को दिखाई जाती है। फिल्म देखने के बाद ही डिस्ट्रीब्यूटर इसे खरीदने के लिए रेट तय करता है। फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर को जो पसंद होता है उसके हिसाब से वो फिल्मों पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं।फिल्म हिट होगी या फ्लॉप, ये सब स्टार कास्ट पर निर्भर करता है। बॉलीवुड में इन दिनों एक ट्रेंड चल रहा है कि फिल्म की कहानी पर स्टार कास्ट से ज्यादा फोकस है। बड़े स्टार्स की वजह से डिस्ट्रीब्यूटर्स की भी खिंचाई होती है।राज बंसल के मुताबिक जब फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर को बेची जाती है तो डिस्ट्रीब्यूटर सब-डिस्ट्रीब्यूटर को फिल्म बेच देता है।

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इसके बाद वे सब-डिस्ट्रिब्यूटर्स फिल्म के प्रिंट अपने इलाके के थिएटर मालिकों को देते हैं।जब कोई फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होती है, तो टिकटों की बिक्री से अर्जित राजस्व को फिल्म का कुल संग्रह कहा जाता है। उसके बाद, टिकट से अर्जित आय को वितरक और थिएटर के प्रबंधक द्वारा पहले के समझौते के आधार पर आपस में विभाजित कर दिया जाता है।नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के राइट्स को बेचकर जो कमाई हुई है, वह सिंडीकेट राइट्स का हिस्सा है। इसके अलावा, सैटेलाइट राइट्स भी सिंडिकेशन का हिस्सा हैं।फिल्मों का म्यूजिक भी खूब कमाता है।बड़े बजट की फिल्मों के लिए अलग-अलग म्यूजिक कंपनियां लाइन में खड़ी होती हैं। जो कंपनी गाने के लिए प्रोड्यूसर को ज्यादा पैसे देती है, उसे फिल्म के गाने और कंपोजिशन राइट्स दिए जाते हैं। गाने को जितने ज्यादा व्यूज मिलते हैं, म्यूजिक कंपनी को उतना ही ज्यादा मुनाफा होता है।

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