Amrish Puri - सरकारी नौकरी छोड़ आए थे फिल्मों में , विलेन की इमेज के खौफ से बेटे के दोस्त नहीं आते थे घर

Amrish Puri - सरकारी नौकरी छोड़ आए थे फिल्मों में , विलेन की इमेज के खौफ से बेटे के दोस्त नहीं आते थे घर

 
ap

अमरीश पुरी जबरदस्त कलाकार थे। ये उनकी अदाकारी का ही कमाल था कि परदे पर निभाए उनके विलेन वाले किरदार चाहे मि. इंडिया का मोगैंबो हो, तहलका का डॉन्ग हो या दामिनी का इंद्रजीत सिंह चड्ढा- सारे कैरेक्टर्स अमर हैं। उनकी विलेन वाली इमेज का रियल लाइफ में भी खौफ था कि उनके बेटे के दोस्त उनके घर आने से घबराते थे। 

बेटे के दोस्त नहीं आते थे घर 

अमरीश पुरी एक उम्दा और दिलदार इंसान थे। समय के पक्के थे। लेट आने पर उन्होंने एक बार गोविंदा को थप्पड़ भी जड़ दिया था। वे अपने जमाने के सबसे महंगे विलेन थे। कहा जाता है कि मि. इंडिया के लिए उनकी फीस एक करोड़ रुपए थी।

पहले थे सरकारी नौकर 

22 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों में आने के लिए पहला ऑडिशन दिया था। तब उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया कि उनका चेहरा पथरीला सा है, हीरो के रोल में नहीं जचेंगे। फिर वो राज्य कर्मचारी बीमा निगम में सरकारी नौकरी पर लग गए। 20 साल से ज्यादा उन्होंने नौकरी की। फिर 40 की उम्र में बतौर विलेन फिल्मों में कदम रखा। यहीं से उनकी जिंदगी बदली और वे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े विलेन बनकर उभरे।

alsoreadHrithik Roshan - 'कृष 4' को रिलीज़ होने में अभी लगेगा टाइम ? 'फाइटर' और 'वॉर 2' को लेकर भी मिला बड़ा अपडेट

मोगैंबो बनने के लिए 20 दिनों तक नहीं देखा था उजाला

अपनी ऑटोबायोग्राफी में अमरीश पुरी ने लिखा था कि मोगैंबो का रोल हिटलर से मिलता-जुलता था। मोगैंबो के रोल में ढलने के लिए अमरीश 20 दिनों तक अंधेरे कमरे में बंद रहे थे। उन्होंने कई दिनों तक उजाला नहीं देखा था।

रेयर थे अमरीश पुरी के पैर

अमरीश पुरी के शरीर की बनावट अलग थी। उन्हें दोनों पैर में अलग साइज के जूते लगते थे। एक पैर का नाप था 11 नंबर और दूसरे का 12 नंबर। नए जूते काटते थे इसलिए वो एक महीने पहले ही कॉस्ट्यूम और जूते पहनकर ट्रायल लेते थे। शूटिंग शुरू होने के 15 दिन पहले ही अमरीश उन्हें पहन-पहनकर पुराने कर लेते थे।

From Around the web