क्यों आपकी रिंग फिंगर में उतना मूवमेंट नहीं हो पता है जितना बाकी उंगलियों में होता है?

क्यों आपकी रिंग फिंगर में उतना मूवमेंट नहीं हो पता है जितना बाकी उंगलियों में होता है?

 
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रिंग फिंगर को अलग से उठाना या मूव करना मुश्किल होता है। आप इसे एक लिमिट से ज्यादा ना तो उठा सकते हैं और ना ही इसे अलग से मूव करना आसान होता है। अगर आप इसे ज्यादा उठाने की कोशिश करेंगे तो इसमें दर्द भी होता है, लेकिन फिर भी आप इसे आसानी से उठा नहीं पाते हैं। आपका अंगूठा ही सबसे आसानी से मूव कर रहा है और आपकी उंगलियों की बात करें तो लिटिल फिंगर यानी सबसे छोटी उंगली भी वैसे ही फ्लेक्सिबल है।

इसका एकमात्र कारण ये है कि इनकी मसल्स इंडिपेंडेंट हैं और ये बहुत ही आसानी से मूव कर सकती हैं। आपकी फोरआर्म यानी हाथ के अगले हिस्से में दो अन्य मसल्स होती हैं जिन्हें लॉन्ग फ्लैक्सर्स कहा जाता है।  हाथों की मसल्स में टेंडन  भी होते हैं जो इन्हें अलग से मूव करने में मदद करते हैं। ऐसे में थंब, इंडेक्स और पिंकी फिंगर या लिटिल फिंगर को अलग से मूव करना आसान होता है।

इन्हीं मसल्स के कारण आप मुट्ठी भी आसानी से बांध सकते हैं।रिंग और मिडिल फिंगर के साथ समस्या ये होती है कि उनमें अलग से फ्लेक्सर्स नहीं होते हैं और भले ही मिडिल फिंगर को थोड़ा सा सपोर्ट बाकी मसल्स से मिल जाता है, लेकिन रिंग फिंगर को वो भी नहीं मिलता है और इसलिए इसे अलग से मूव करना या बाकी उंगलियों की तरह खड़ा करना बहुत मुश्किल होता है। इसका दूसरा कारण ये है कि सभी उंगलियों की मसल्स दिमाग से कनेक्ट होती हैं ।

  क्योंकि इन दोनों नर्व्स के बीच में ब्रांचिंग होती है इसलिए उंगलियां एक दूसरे से कनेक्ट रहती हैं। क्योंकि रिंग फिंगर और लिटिल फिंगर दोनों ही एक साथ जुड़े हुए होते हैं इसलिए इन्हें अलग से मूव करना मुश्किल होता है। मिडिल फिंगर इसलिए इतनी आसानी से मूव कर पाती है क्योंकि इसे दो अलग तरह के सिग्नल मिलते हैं।

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