बीरबल की मौत के बाद अख़बार का क्या हाल हुआ ?

बीरबल की मौत के बाद अख़बार का क्या हाल हुआ ?

 
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बीरबल पहले व्यक्ति थे, जो अकबर के दरबार में 1556 ईसवीं में शामिल हुए थे।उन्होंने धीरे-धीरे राजसी मामलों में अपनी भागीदारी देनी शुरू की और अपनी सूझबूझ से मामले हल करने के चलते अकबर के फ़ेवरेट बन गए। कहा जाता है कि उन्हें राजा के टाइटल से भी नवाजा गया था और उनके पास 2000 सैनिक भी थे।

इसके साथ ही उन्हें 'कवियों का राजा' भी कहा जाने लगा।बीरबल ने अपनी बुद्धिमता और हाज़िर-जवाबी से मुग़ल सम्राट अकबर के दिल में अपनी एक ख़ास जगह बना रखी थी। किसी परेशानी में होने पर बादशाह भी सबसे पहले बीरबल को याद करते थे और जवाब में बीरबल भी उन्हें कभी निराश होने का मौका नहीं देते थे।अकबर जब फ़तेहपुर सीकरी का निर्माण करा रहे थे, तो उन्होंने एक क़िला बीरबल के लिए भी बनवाने के लिए कहा था।

ताकि वो दोनों रोज़ मुलाकात कर सकें। कहा जाता है कि बीरबल ने बादशाह के दरबार में 30 सालों से भी ज़्यादा काम किया। लेकिन इस दौरान उन्हें एक बार भी महाराजा के गुस्से का सामना नहीं करना पड़ा। बीरबल की मौत की ख़बर मिलने के बाद अकबर की आंखों की नींद उड़ गई थी। बताया जाता है कि उन्होंने काफ़ी समय तक खाना-पीना छोड़ दिया था। बादशाह इस बात की कल्पना करते सिहर जाते थे कि उनके चहेते वजीर की कटी-फटी, खून से सनी लाश पहाड़ियों में कहीं पड़ी होगी।

बादशाह की इस हालत को देखते हुए राजा मान सिंह ने अकबर से वायदा किया कि वो उस इलाके के राजा को बांध कर धकेलते हुए सामने लाएंगे और उसके क़िले को गिरा कर शहर को जला देंगे। बीरबल की मौत के बाद कई अफ़वाहें उड़ती रहीं कि वो जिंदा है आर फ़लाना जगह देखे गए हैं। जैसे ही ये ख़बर बादशाह के कानों में पड़ती थी, वो तुरंत अपनी सेना वहां भेज देते थे। बीरबल की मौत के बाद अकबर का दिल भारी हो गया और वह फतेहपुर सीकरी कभी नहीं गए।

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