भारतीय रेलवे की पहली महिला लोको पायलट 'सुरेखा यादव' ने केवल महिला स्टाफ के साथ चलाई मुंबई-लखनऊ ट्रैन

भारतीय रेलवे की पहली महिला लोको पायलट 'सुरेखा यादव' ने केवल महिला स्टाफ के साथ चलाई मुंबई-लखनऊ ट्रैन

 
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आजकल के दौर में महिलाएं पुरुषों से कम नहीं है। महिलाएं हर फील्ड में पुरुषों को मात दे रही हैं। महिलाएं रसोई में रोटी बनाने से लेकर हवा हवाई जहाज तक चला सकती हैं। भारत के अधिकतर कई क्षेत्रों में पहले सिर्फ पुरुषों को प्रधानता दी जाती थी। भारत की जय भारतीय रेलवे की तो रेलवे में भी रेलवे ड्राइवर या लोको पायलट (Loco Pilot) की नौकरी पर आमतौर पर पुरूषों का ही साम्राज्य रहा है। यहां तक की लोको पायलट ही नहीं रेलवे मे अधिकतर सभी प्रकार की नौकरियां पुरुषों को ही दी जाती थी। 

लेकिन पुरूषों के इस एकाधिकार को तोड़ा महाराष्ट्र की सुरेखा यादव (Surekha Yadav) ने। उनकी बात करें तो सन 1988 में वह भारत की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर (Woman Train Driver) बनीं और भारतीय रेलवे में अपना नाम इतिहास के पन्नों में लिख डाला। ऐसे में 44 साल बाद 2021 में फिर से ऐसा ही एक नया रेकॉर्ड बना था। मुंबई-लखनऊ स्पेशल ट्रेन रवाना की गई थी। और इस ट्रेन को चलाया सुरेखा यादव ने।

यह नया रिकॉर्ड  सुरेखा के नाम पर दर्ज किया गया। सुरेखा यादव मुंबई से लखनऊ तक ट्रेन लेकर आईं थीं। इस ट्रेन में एक खास बात थी। ट्रेन में खास यह था कि इसका पूरा स्टाफ महिला ही था। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भारतीय रेलवे ने यह है पहल की थी।  रेलवे की पहली महिला ड्राइवर सुरेखा यादव, टीटीई समेत अन्य सपॉर्टिंग स्टाफ महिला ही था। रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने इस अवसर पर ट्वीट किया कि 'International Womens Day पर, झांसी और ग्वालियर के बीच बुंदेलखंड स्पेशल ट्रेन के संचालन और परिचालन महिलाओं की एक टीम द्वारा काम किया गया ।'

 इसके अलावा महिला दिवस पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस की कमान लोको पायलट कौशल्या देवी व सहायक लोको पायलट आकांक्षा गुप्ता ने संभाली थी। जिसमें महिला लोको पायलट, महिला सहायक लोको पायलट, टीटीई, गार्ड, सहित आरपीएफ का स्टाफ भी महिलाओं का ही था।

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