अपनी टेडी मेडी रेखाओ से आम आदमी को पहचान को पहचान देने वाले 'आर.के.लक्ष्मण‌‌'

अपनी टेडी मेडी रेखाओ से आम आदमी को पहचान को पहचान देने वाले 'आर.के.लक्ष्मण‌‌'

 
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बचपन की यादों में अहम याद है टीवी के आगे घंटों समय बिताना और कार्टून देखना। जब भी इस याद को ताजा किया जाता है तो दिमाग में सबसे पहले नाम आता है मालगुडी डेज का। मालगुडी डेज याद होगा तो उसके साथ दिखाए जाने वाले स्कैच भी याद आते हैं । इन्हें बनाने वाले देश के मशहूर कार्टूनिस्ट थे आर.के.लक्ष्मण‌‌।  आर.के.लक्ष्मण का नाम रखा गया था रासीपुरम कृष्णा स्वामी लक्ष्मण लेकिन आगे चलकर वह आर.के.लक्ष्मण के नाम से जाने गए।

उनके बारे में बताया जाता है कि बचपन से ही वह ड्रॉइंग करने में काफी दिलचस्पी लेते थे। हमेशा दीवारों पर आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचते रहते थे। बच्चे अक्सर ऐसा करते हैं, मगर लक्ष्मण कला की इस दुनिया को लेकर काफी गंभीर थे।वह जाने-माने लेखक और मालगुडी डेज लिखने वाले आर.के.नारायण के भाई थे. बताया जाता है कि आर.के.नारायण की कहानी दोड़ू आर.के.लक्ष्मण पर ही केंद्रित थी। मालगुडी डेज को जब टीवी पर दिखाया गया तब इसके लिए सारी इल्स्ट्रेशन आर.के.लक्ष्मण ने ही बनाए थे।

आर.के.लक्ष्मण देश के पहले ऐसे कार्टूनिस्ट थे, जिनकी एग्जीबिशन लंदन में आयोजित की गई। पुणे के सिंबोसिस इंस्टीट्यूट में उनका एक तांबे का स्टैच्यु भी है जिसे कॉमन मैन नाम दिया गया है। यही नहीं सिंबोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में एक चेयर का नाम भी आर.के.लक्ष्मण के नाम पर रखा गया है।आर.के.लक्ष्मण के पॉलिटिकल कार्टून हमेशा ही चर्चा में रहे। खासतौर पर उनका कार्टून 'कॉमन मैन' तो आज भी याद किया जाता है।

अपने काम को लेकर उनकी शिद्दत इस घटना से भी सामने आती है। एक समय में बाल ठाकरे और आर.के.लक्ष्मण एक साथ ही नौकरी करते थे। दोनों ही कार्टूनिस्ट भी थे और अच्छे दोस्त भी। जब बाल ठाकरे कार्टूनिंग छोड़कर राजनीति में आ गए और महाराष्ट्र के बड़े नेता बन गए, तब आर.के.लक्ष्मण ने उनके खिलाफ भी पॉलिटिकल कार्टून बनाए थे।

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